

विचित्रवीर हनुमान स्तोत्र के पाठ से कुंडली में शनि-मंगल के दोष , सड़क दुर्घटनाओं से बचाव, शारीरिक कष्ट एवं दांपत्य जीवन में अशांति से मुक्ति मिलती है। विशेष पूजन: संध्या काल में लाल वस्त्र बिछाकर विचित्र वीर हनुमान का उत्तरमुखी होकर विधिवत पूजन करें, तिल के तेल का दीप करें, धूप करें, पीपल के पत्ते चढ़ाएं, काजल चढ़ाएं, उड़द से बने मिष्ठन का भोग लगाएं तथा रुद्राक्ष माला से इस विशिष्ट मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद भोग काली गाय को खिला दें।
विचित्र वीर हनुमान स्तोत्र - विनियोग:
अस्य श्रीविचित्रवीर हनुमन्मालामन्त्रस्य श्रीरामचन्द्रो भगवानृषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीविचित्रवीरहनुमान् देवता, ममाभीष्टसिद्ध्यर्थे मालामन्त्र जपे विनियोगः ।
विचित्र वीर हनुमान स्तोत्र - अथ करन्यासः
ॐ ह्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः ।
ॐ ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रैं अनामिकाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।
ॐ ह्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ।
विचित्र वीर हनुमान स्तोत्र - अथ अङ्गन्यासः
ॐ ह्रां हृदयाय नमः ।
ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा ।
ॐ ह्रूं शिखायै वषट् ।
ॐ ह्रैं कवचाय हुम् ।
ॐ ह्रौं नेत्रत्रयाय वौषट् ।
ॐ ह्रः अस्त्राय फट् ।
विचित्र वीर हनुमान स्तोत्र - अथ ध्यानम्
वामे करे वैरवहं वहन्तं शैलं परे श्रृङ्खलमालयाढ्यम् ।
दधानमाध्मातसुवर्णवर्णं भजे ज्वलत्कुण्डलमाञ्जनेयम् ॥
ॐ नमो भगवते विचित्रवीरहनुमते प्रलयकालानल प्रज्वलनाय प्रतापवज्रदेहाय अञ्जनीगर्भसम्भूताय प्रकटविक्रमवीरदैत्य-दानवयक्षराक्षोगणग्रहबन्धनाय भूतग्रहबन्धनाय प्रेतग्रहबन्धनाय पिशाचग्रहबन्धनाय शाकिनीडाकिनीग्रहबन्धनाय काकिनीकामिनीग्रहबन्धनाय ब्रह्मग्रहबन्धनाय ब्रह्मराक्षसग्रहबन्धनाय चोरग्रहबन्धनाय एहि एहि आगच्छ आगच्छ आवेशय आवेशय मम हृदये प्रवेशय प्रवेशय स्फुर स्फुर प्रस्फुर प्रस्फुर सत्यं कथय कथय व्याघ्रमुखं बन्धय बन्धय सर्पमुखं बन्धय बन्धय राजमुखं बन्धय बन्धय सभामुखं बन्धय बन्धय शत्रुमुखं बन्धय बन्धय सर्वमुखं बन्धय बन्धय लङ्काप्रासादभञ्जन अमुकं मे वशमानय वशमानय क्लीं क्लीं क्लीं ह्रीं श्रीं श्रीं राजानं वशमानय श्रीं ह्रीं क्लीं स्त्रीणां आकर्षय आकर्षय शत्रून् मर्दय मर्दय मारय मारय चूर्णय चूर्णय खे खे खे श्रीरामचन्द्राज्ञया मम कार्यसिद्धिं कुरु कुरु ओं ह्रां ह्रीं हूं हैं ह्रौं ह्रः फट् स्वाहा । विचित्रवीर हनुमन् मम सर्व मम शत्रून् भस्मी कुरु कुरु हन हन हुं फट् स्वाहा ॥
इति श्री विचित्रवीर हनुमन् मालामन्त्रः ॥
इति श्रीविचित्रवीरहनुमन्मालामन्त्रः सम्पूर्णम्
Q1: विचित्रवीर हनुमान स्तोत्र के पाठ से कौन से लाभ मिलते हैं?
Ans: विचित्रवीर हनुमान स्तोत्र के पाठ से कुंडली में शनि-मंगल के दोष, सड़क दुर्घटनाओं से बचाव, शारीरिक कष्ट एवं दांपत्य जीवन में अशांति से मुक्ति मिलती है।
Q2 : विचित्रवीर हनुमान स्तोत्र की पूजन और पाठ विधि क्या है?
Ans: संध्या काल में लाल वस्त्र बिछाकर उत्तरमुखी होकर विचित्र वीर हनुमान का विधिवत पूजन करें। तिल के तेल का दीप करें, धूप दिखाएं, पीपल के पत्ते और काजल चढ़ाएं, उड़द से बने मिष्ठान का भोग लगाएं तथा रुद्राक्ष माला से इस विशिष्ट मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद भोग काली गाय को खिला दें।
Q3 : विचित्रवीर हनुमान स्तोत्र पाठ के अंतर्गत क्या-क्या शामिल है?
Ans: इसमें विचित्र वीर हनुमान स्तोत्र मंत्र, विनियोग, करन्यास, अंगन्यास, ध्यानम्, और मूल मालामंत्र तथा उसका हिंदी भावार्थ शामिल है।
Q4 : विचित्रवीर हनुमान मालामन्त्र के ऋषि और छंद कौन से हैं?
Ans: इस श्रीविचित्रवीर हनुमन्मालामन्त्र के ऋषि भगवान श्रीरामचन्द्रो, छंद अनुष्टुप् और देवता श्रीविचित्रवीर हनुमान जी हैं।
Q5: विचित्रवीर हनुमान माला मंत्र क्या है? इसका पूजन विधान क्या है?
यह भगवान हनुमान के वीर और उग्र स्वरूप से संबंधित एक पारंपरिक माला-मंत्र है, जिसमें रक्षा, बाधा-निवारण और कार्य-सिद्धि की प्रार्थना की गई है।
विशेष पूजन विधान : संध्या काल में लाल वस्त्र बिछाकर श्री विचित्र वीर हनुमान का उत्तरमुखी होकर विधिवत पूजन करें, तिल के तेल का दीप - धूप करें, पीपल के पत्ते चढ़ाएं, काजल चढ़ाएं, उड़द से बने मिष्ठन का भोग लगाएं तथा रुद्राक्ष माला से इस विशिष्ट मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद भोग काली गाय को खिला दें।