पितृपक्ष पितरपख 2026
यह 17 दिनों तक चलता है

पितृपक्ष पितरपख पूर्णिमा श्राद्ध से सर्वपितृ अमावस्या तक यह 17 दिनों तक चलता है
Pitri Paksha - From 26 September 2026, to October 10, 2026.
पितृ पक्ष 26 सितंबर 2026 से शुरू हो रहा है और इसका समापन10 अक्टूबर 2026 को होगा। इस बार पूर्णिमा का श्राद्ध 26 सितम्बर 2026 को है और सर्वपितृ अमावस्या - 10 अक्टूबर 2026 को है।
17 दिनों तक का पितृपक्ष निम्नवत है -
17 दिनों तक का पितृपक्ष निम्नवत है -
शनिवार, 26 सितम्बर 2026- पूर्णिमा श्राद्ध
रविवार, 27 सितम्बर 2026- प्रतिपदा श्राद्ध
सोमवार, 28 सितम्बर 2026- द्वितीया श्राद्ध
मंगलवार, 29 सितम्बर 2026- तृतीया श्राद्ध एवं महाभरणी श्राद्ध
बुधवार, 30 सितम्बर 2026- चतुर्थी श्राद्ध एवं पंचमी श्राद्ध
बृहस्पतिवार, 01 अक्टूबर 2026- षष्ठी श्राद्ध
शुक्रवार, 02 अक्टूबर 2026- सप्तमी श्राद्ध
शनिवार, 03 अक्टूबर 2026- अष्टमी श्राद्ध
रविवार, 04 अक्टूबर 2026- नवमी श्राद्ध
सोमवार, 05 अक्टूबर 2026- दशमी श्राद्ध
मंगलवार, 06 अक्टूबर 2026- एकादशी श्राद्ध
बुधवार, 07 अक्टूबर 2026- द्वादशी श्राद्ध एवं मघा श्राद्ध
बृहस्पतिवार, 08 अक्टूबर 2026- त्रयोदशी श्राद्ध
शुक्रवार, 09 अक्टूबर 2026- चतुर्दशी श्राद्ध
शनिवार- 10 अक्टूबर 2026- सर्वपितृ अमावस्या (पितृ पक्ष का आखिरी दिन)
The 17-day long Pitru Paksha is as follows -
Saturday, September 26, 2026 – Purnima Shraddh
Sunday, September 27, 2026 – Pratipada Shraddh
Monday, September 28, 2026 – Dwitiya Shraddh
Tuesday, September 29, 2026 – Tritiya Shraddh & Mahabharani Shraddh
Wednesday, September 30, 2026 – Chaturthi Shraddh & Panchami Shraddh
Thursday, October 01, 2026 – Shashthi Shraddh
Friday, October 02, 2026 – Saptami Shraddh
Saturday, October 03, 2026 – Ashtami Shraddh
Sunday, October 04, 2026 – Navami Shraddh
Monday, October 05, 2026 – Dashami Shraddh
Tuesday, October 06, 2026 – Ekadashi Shraddh
Wednesday, October 07, 2026 – Dwadashi Shraddh & Magha Shraddh
Thursday, October 08, 2026 – Trayodashi Shraddh
Friday, October 09, 2026 – Chaturdashi Shraddh
Saturday, October 10, 2026 – Sarvapitri Amavasya
पितृ पक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध या पितृ तर्पण करना बेहद ही शुभ माना जाता है, क्योंकि इस अवसर पर व्यक्ति श्रद्धांजलि देकर अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं। पितृ पक्ष अपने पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने का समय होता है, जिनका निधन हो चुका हैं।
पितृ पक्ष की इस अवधि में अच्छे कर्म और दान के कार्यों को करने के लिए एक शुभ समय माना जाता है। साथ ही इस दिन उदारता के कार्य करके व्यक्ति पितृ दोष से भी छुटकारा पा सकता है।
श्राद्ध करने से होती है पितृदोष से मुक्ति
हिंदू धर्म में हर माह की अमावस्या के दिन पितर तर्पण किया जाता है। लेकिन पितृ पक्ष का समय काफी शुभ माना जाता है और इस दौरान अपने पूर्वजों का श्राद्ध करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर आपको अपने पूर्वजों की परलोक गमन की तिथि याद है, तो आपको उसी तिथि पर उनका श्राद्ध करना चाहिए और उनसे आशीर्वाद लेना चाहिए। यदि आपको अपने पूर्वजों की देहावसान की तिथि ज्ञात नहीं है, तो आपको सर्व पितृ अमावस्या के दिन अपने पूर्वजों का श्राद्ध करना चाहिए। अगर किसी परिजन की दुर्घटना, आत्महत्या या अकाल मृत्यु हुई है, तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि पर करना चाहिए। पिता का अष्टमी और माता का नवमी तिथि पर श्राद्ध करना उत्तम माना जाता हैं।
श्राद्ध के दौरान भूल कर भी न करें ऐसे कार्य -
इस दिन आपको, काली उड़द, चना, काला जीरा, काला नमक और बासी भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
पितृ पक्ष के दौरान नशीली चीजों का सेवन न करें, क्योंकि इस दौरान शराब या अन्य नशीली चीजों का सेवन करना अशुभ माना जाता हैं।
पितृ देवताओं को मांसहारी भोजन पसंद नहीं होता है, इसलिए इस दिन मांसाहारी भोजन न खाएं।
श्राद्ध के दिन किसी भी अन्य व्रत या पूजा करने से बचना चाहिए।
आपको श्राद्ध के दिन नए कपड़े नहीं पहनने चाहिए। लेकिन धुले हुए स्वच्छ कपड़े अवश्य पहनने चाहिए
पितृ पक्ष में बाल, नाखून, दाढ़ी नहीं काटनी चाहिए। साथ ही पितृ पक्ष के दौरान आपको प्याज और लहसुन का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
पितृ पक्ष के दौरान आपको चमड़े की वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।
आपको श्राद्ध की पूजा लोहे के बर्तनों में नहीं करनी चाहिए। इसकी जगह आप पीतल, चांदी और तांबे के बर्तन का उपयोग कर सकते हैं।
इस दौरान घर के लिए नया समान व फर्नीचर न खरीदें।
आपको भूलकर भी इस समय अपने बुजुर्गों या पूर्वजों का अपमान नहीं करना चाहिए।
श्राद्ध के दिन किसी भी प्रकार के शुभ कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण आदि नहीं करना चाहिए।
इस दौरान किसी भी पशु-पक्षी को नुकसान न पहुचांए। किसी के साथ भी गलत व्यवहार न करें।
भारत में ख़ास खास जगहों पर पितृपक्ष में पिंडदान के लिए पंडित और पंडे उपलब्ध रहते हैं परन्तु आर्थिक या दूसरे कारणों से आप अगर पंडित से श्राद्ध नहीं करा पाते हों तो खुद से हीं तर्पण करना चाहिये। इसके लिये -
1. सूर्य नारायण के आगे अपने बगल खुले करके (दोनों हाथ ऊपर करके) बोलें : "हे सूर्य नारायण ! मेरे पिता (नाम ), अमुक (नाम) का बेटा, अमुक जाति (नाम), (अगर जाति, कुल, गोत्र नहीं याद तो ब्रह्म गोत्र बोल दें) को आप संतुष्ट/सुखी रखें । इस निमित मैं आपको अर्घ्य व भोजन करता हूँ ।" ऐसा करके आप सूर्य भगवान को अर्घ्य दें और भोग लगायें ।
2. श्राद्ध पक्ष में 1 माला रोज द्वादश अक्षर मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" की जप करनी चाहिए और उस जप का फल नित्य अपने पितृ को अर्पण करना चाहिए ।
3. विचारशील पुरुष को चाहिए कि जिस दिन श्राद्ध करना हो उससे एक दिन पूर्व ही संयमी, श्रेष्ठ ब्राह्मणों को२ निमंत्रण दे दें । परंतु श्राद्ध के दिन कोई अनिमंत्रित तपस्वी ब्राह्मण घर पर पधारें तो उन्हें भी भोजन कराना चाहिए ।
4. भोजन के लिए उपस्थित अन्न अत्यंत मधुर,भोजनकर्ता की इच्छा के अनुसार तथा अच्छी प्रकार सिद्ध किया हुआ होना चाहिए ।
5. पात्रों में भोजन रखकर श्राद्धकर्ता को अत्यंत सुंदर एवं मधुर वाणी से कहना चाहिए कि 'हे महानुभावो ! अब आप लोग अपनी इच्छा के अनुसार भोजन करें ।' श्रद्धायुक्त व्यक्तियों द्वारा नाम और गोत्र का उच्चारण करके दिया हुआ अन्न- पितृगण को वे जैसे आहार के योग्य होते हैं वैसा ही होकर मिलता है । (विष्णु पुराणः 3.16,16)
6. श्राद्धकाल में शरीर, द्रव्य, स्त्री, भूमि, मन,मंत्र और ब्राह्मण-ये सात चीजें विशेष शुद्ध होनी चाहिए ।
7. श्राद्ध में तीन बातों को ध्यान में रखना चाहिए : शुद्धि, अक्रोध और अत्वरा (जल्दबाजी नहीं करना )।
8. श्राद्ध में मंत्र का बड़ा महत्त्व है । श्राद्ध में आपके द्वारा दी गयी वस्तु कितनी भी मूल्यवान क्यों न हो, लेकिन आपके द्वारा यदि मंत्र का उच्चारण ठीक न हो तो काम अस्त-व्यस्त हो जाता है। मंत्रोच्चारण शुद्ध होना चाहिए और जिसके निमित्त श्राद्ध करते हों उसके नाम का उच्चारण भी शुद्ध करना चाहिए।
